what is CSAM

CSAM क्या है? | Child Sexual Abuse Material

CSAM का पूरा नाम क्या है? CSAM का मतलब है Child Sexual Abuse Material।यह शब्द “Child Pornography” के स्थान पर अधिक उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इसमें “पोर्नोग्राफी” जैसी सहमति आधारित अवधारणा नहीं, बल्कि बच्चों के साथ यौन शोषण का स्पष्ट अपराध शामिल होता है। CSAM में वह कोई भी फोटो, वीडियो, ऑडियो, डिजिटल फाइल, एनीमेशन या मॉर्फ की गई (edited) सामग्री शामिल होती है जिसमें 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे को यौन गतिविधि में दिखाया गया हो या यौन रूप से प्रदर्शित किया गया हो। भारत में CSAM पर लागू प्रमुख कानून भारत में CSAM से संबंधित अपराधों पर मुख्य रूप से दो कानून लागू होते हैं: Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO Act) Information Technology Act (IT Act, 2000) दोनों कानून साथ-साथ लागू हो सकते हैं। 1️⃣ POCSO Act में CSAM से संबंधित धाराएँ POCSO Act बच्चों को यौन शोषण से सुरक्षा देने वाला विशेष कानून है। CSAM सीधे तौर पर इस अधिनियम के अंतर्गत अपराध है। 🔹 धारा 13 – बच्चे को अश्लील सामग्री के लिए उपयोग करना यदि कोई व्यक्ति: बच्चे को फोटो/वीडियो में यौन गतिविधि में शामिल करे बच्चे की यौन छवि बनाये डिजिटल या प्रिंट माध्यम से प्रसारित करे तो यह धारा 13 के अंतर्गत अपराध है। 🔹 धारा 14 – सज़ा पहली बार अपराध: 5 वर्ष तक की सज़ा + जुर्माना दोबारा अपराध: 7 वर्ष या अधिक + जुर्माना 🔹 धारा 15 – संग्रह (Storage) / डाउनलोड यदि कोई व्यक्ति: CSAM डाउनलोड करता है मोबाइल/लैपटॉप में स्टोर करता है शेयर करने के इरादे से रखता है तो यह भी अपराध है। केवल “देखना” भी यदि जानबूझकर है और रिपोर्ट नहीं किया गया है, तो कानूनी जोखिम उत्पन्न कर सकता है। 2️⃣ IT Act, 2000 में CSAM से संबंधित धाराएँ 🔹 धारा 67B – Child Pornography से संबंधित अपराध यह धारा विशेष रूप से बच्चों की अश्लील सामग्री के लिए है। इसमें शामिल हैं: प्रकाशित करना ट्रांसमिट करना ब्राउज़ करना डाउनलोड करना विज्ञापन देना बच्चों को ऑनलाइन यौन कृत्य में लुभाना सज़ा: पहली बार: 5 वर्ष तक की सज़ा + ₹10 लाख तक जुर्माना दूसरी बार: 7 वर्ष तक की सज़ा + अधिक जुर्माना क्या केवल फॉरवर्ड करना भी अपराध है? हाँ। WhatsApp, Telegram, Instagram या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर: CSAM फॉरवर्ड करना ग्रुप में शेयर करना लिंक भेजना सभी अपराध की श्रेणी में आते हैं। क्या POCSO Act CSAM पर लागू होता है? ✅ हाँ, बिल्कुल लागू होता है। यदि: बच्चे की यौन छवि बनाई गई है किसी बच्चे को वीडियो में दिखाया गया है मॉर्फिंग करके अश्लील बनाया गया है तो POCSO की धारा 13, 14, 15 लागू हो सकती है।साथ ही IT Act की धारा 67B भी लागू होगी। अर्थात, आरोपी पर दोनों कानूनों के तहत केस दर्ज हो सकता है। CSAM के प्रकार वास्तविक वीडियो/फोटो मॉर्फ की गई तस्वीर AI द्वारा बनाई गई नकली छवि लाइव स्ट्रीमिंग डार्क वेब कंटेंट महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु 🔸 सहमति अप्रासंगिक है यदि बच्चा “सहमति” देता भी है, तो भी कानून में वह मान्य नहीं। 🔸 आयु 18 वर्ष से कम 18 वर्ष से कम कोई भी व्यक्ति बच्चा है। 🔸 रिपोर्ट करना अनिवार्य POCSO की धारा 19 के अनुसार: जानकारी होने पर रिपोर्ट करना आवश्यक है। रिपोर्ट न करने पर सज़ा हो सकती है। जांच प्रक्रिया कैसे होती है? FIR दर्ज डिजिटल डिवाइस जब्त फॉरेंसिक जांच IP एड्रेस ट्रैकिंग सोशल मीडिया डेटा रिकवरी Special POCSO Court में ट्रायल होता है। क्या “गलती से” डाउनलोड होने पर भी अपराध है? कानून में “mens rea” (इरादा) महत्वपूर्ण है।लेकिन यदि कोई व्यक्ति: जानबूझकर साइट ब्राउज़ करता है डाउनलोड करता है डिलीट नहीं करता रिपोर्ट नहीं करता तो कानूनी कार्यवाही संभव है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के दृष्टिकोण भारतीय न्यायालयों ने माना है: बच्चों की गरिमा सर्वोपरि है CSAM गंभीर अपराध है केवल स्टोरेज भी अपराध हो सकता है CSAM और सोशल मीडिया आज अधिकतर मामले: Telegram WhatsApp Instagram Dark Web से जुड़े होते हैं। सरकार और एजेंसियां AI आधारित मॉनिटरिंग कर रही हैं। बचाव और सावधानियाँ ✅ अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें✅ संदिग्ध कंटेंट तुरंत रिपोर्ट करें✅ बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा सिखाएं✅ पैरेंटल कंट्रोल का उपयोग करें✅ VPN या डार्क वेब गतिविधि से बचें सज़ा कितनी गंभीर हो सकती है? CSAM मामलों में: 5 से 7 वर्ष कारावास आजीवन कारावास (गंभीर मामलों में) भारी जुर्माना पासपोर्ट रद्द सरकारी नौकरी समाप्त निष्कर्ष CSAM एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील अपराध है।भारत में: POCSO Act IT Act की धारा 67B दोनों मिलकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। डिजिटल युग में जागरूकता और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।कानून सख्त है और दंड भी कठोर। Child Sexual Abuse Material (CSAM) refers to any content that visually depicts a minor engaged in sexual activity or displays a child’s sexual organs for sexual purposes. The term “CSAM” is legally and academically preferred over “child pornography” because children cannot legally consent to sexual activity. Such material represents abuse, exploitation, and criminal conduct. In India, CSAM is treated as a grave criminal offence and is governed primarily by: The Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO Act, 2012) The Information Technology Act (IT Act, 2000) Both statutes often operate together in prosecuting CSAM-related offences. 1. Legal Definition of a Child Under the POCSO Act: A “child” means any person below 18 years of age. Consent of a minor is legally invalid. Even if a minor appears willing, the law treats any sexual depiction or exploitation as an offence. 2. What Constitutes CSAM? CSAM includes: Photographs or videos of a child engaged in sexual activity Images focusing on a child’s sexual organs for sexual purposes Morphed or digitally altered sexual images of minors AI-generated sexual images resembling minors Live-streamed sexual exploitation Storage or distribution of such material The offence exists whether the content is created, possessed, transmitted, or commercially circulated. 3. CSAM under the POCSO Act, 2012 The POCSO Act specifically criminalizes the use of children for pornographic purposes. Section 13 – Use of Child for Pornographic Purposes This section applies where a person: Uses a child in any form of sexual depiction Produces, directs, or participates